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BRICS Membership: ब्रिक्स का हुआ विस्तार, 5 नये देश बने स्थायी सदस्य; भारत की पहल का मिला समर्थन
BRICS Membership का दायरा बढ़ गया है। यह एक ऐतिहासिक कदम है और आगे भी विस्तार की प्रबल संभावना व्यक्त किया गया है।

BRICS Membership का दायरा बढ़ गया है। यह एक ऐतिहासिक कदम है और आगे भी विस्तार की प्रबल संभावना व्यक्त किया गया है। ब्रिक्स (BRICS ) अब 10 देशों का संगठन बन गया है।
BRICS Membership वाले 5 नये देश
भारत, रूस और चीन सहित शीर्ष उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले ब्रिक्स समूह ने वैश्विक मामलों में पश्चिमी प्रभुत्व की पृष्ठभूमि में अपनी रणनीतिक शक्ति बढ़ाने के प्रयास के तहत इसमें पांच पूर्ण सदस्यों को शामिल करने की घोषणा की है। जिसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात नए सदस्य के रूप में शामिल हो गए हैं।
BRICS Membership: मॉस्कों में हुई घोषणा
ब्रिक्स (Brics) दुनिया के विकासशील देशों का एक समूह है। वर्तमान में ब्रिक्स की अध्यक्षता रूस के पास है। अभी तक ब्रिक्स में सिर्फ भारत, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील ही शामिल थे। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के मुख्य सदस्य हैं और यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यह पिछले सालों में वैश्विक आर्थिक विकास का एक प्रमुख प्रेरक रहा है।
मॉस्को में आयोजित एक बैठक के दौरान नए सदस्यों को औपचारिक रूप से शामिल करने की घोषणा की गई। मॉस्को के ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के तुरंत बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि समूह अब दस देशों का संगठन बन गया है।

BRICS Membership: पुतिन की पहल
पुतिन ने कहा कि लगभग 30 और देश ब्रिक्स बहुपक्षीय एजेंडे में शामिल होने के इच्छुक हैं। अपने संबोधन में रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात नए पूर्ण सदस्यों के रूप में ब्रिक्स में शामिल हुए हैं, जो संगठन की बढ़ती ताकत और अंतरराष्ट्रीय मामलों में प्रभाव का एक मजबूत संकेत है।”
पुतिन ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर, हमारी अध्यक्षता के तहत कई रूसी शहरों में विभिन्न स्तरों और प्रकारों के 200 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हम अपने संगठन के साथ सहयोग करने में रुचि रखने वाले सभी देशों के प्रतिनिधियों को इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अक्टूबर में कज़ान में हमारी अध्यक्षता के तहत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होगा।’
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BRICS Membership: जोहानिसबर्ग में पड़ी थी नींव
बीते साल अगस्त 2023 में जोहान्सबर्ग में आयोजित आखिरी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में समूह के नेताओं ने 1 जनवरी से अर्जेंटीना समेत छह देशों को इस समूह में जोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि, अर्जेंटीना के नए राष्ट्रपति हाविएर मिलेई ने पिछले दिनों ब्रिक्स के प्रभावशाली होते संगठन में शामिल होने से औपचारिक तौर पर इनकार कर दिया।
ब्रिक्स के विस्तार की कवायद
पांचों देशों के नेताओं को भेजे एक पत्र में मिलेई ने कहा था कि अभी उनके देश के लिए इस संगठन की पूर्ण सदस्यता का सही समय नहीं है। यह पत्र 22 दिसंबर को लिखा गया था। जिसे बीते दिनों में जारी किया गया। मिलेई के पूर्ववर्ती वामपंथी नेता अल्बेर्टो फर्नान्डेज ने ब्रिक्स की सदस्यता का समर्थन किया था।
फिलहाल रूस के ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालते ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि यह समूह अब 10 देशों का संगठन बन गया है, जिसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात नए सदस्य के रूप में शामिल हो गए हैं। हालाँकि, अर्जेंटीना के नए राष्ट्रपति जेवियर माइली ने पिछले हफ्ते अपने देश को ब्रिक्स (ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका) का सदस्य बनने का प्रस्ताव वापस लेने की घोषणा की।
भविष्य में भी विस्तार संभावना
पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स लगातार बढ़ती संख्या में समर्थकों और समान विचारधारा वाले देशों को आकर्षित कर रहा है जो संप्रभु समानता, खुलेपन, आम सहमति और एक बहुध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसे इसके मूल सिद्धांतों का समर्थन करते हैं और एक निष्पक्ष वैश्विक वित्तीय के निर्माण पर सहमत हैं।
उन्होंने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि हम परंपराओं को संरक्षित करते हुए और वर्षों से संगठन द्वारा हासिल अनुभव द्वारा निर्देशित होकर नए सदस्यों को इसकी गतिविधियों के सभी प्रारूपों में शामिल करने में सुविधा देंगे।”
पुतिन ने कहा, “सामान्य तौर पर, रूस तीन प्रमुख क्षेत्रों में ब्रिक्स साझेदारी के सभी पहलुओं को बढ़ावा देना जारी रखेगा। ये हैं- राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त, और मानवीय संबंध।” उन्होंने कहा, “स्वाभाविक रूप से हम सदस्य देशों के बीच विदेश नीति समन्वय बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए चुनौतियों और खतरों के लिए संयुक्त रूप से प्रभावी प्रतिक्रिया खोजने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।”
कब हुई थी ब्रिक्स की स्थापना?
इस समूह की स्थापना सितंबर 2006 में चार देशों ब्राजील, रूस, भारत और चीन के एक समूह के रूप में की गई थी। दक्षिण अफ्रीका को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल करने के बाद सितंबर 2010 में इसका नाम बदलकर ब्रिक्स कर दिया गया।
समन्वय का नया अध्याय
- पुतिन ने ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच विदेश नीति समन्वय बढ़ाने की रूस की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए चुनौतियों और खतरों के लिए संयुक्त प्रतिक्रिया विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- इसके अतिरिक्त, ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी 2025 के लिए रणनीति और ब्रिक्स नवाचार सहयोग 2021-2024 के लिए कार्य योजना के व्यावहारिक कार्यान्वयन को प्राथमिकता दी जाएगी।
- रूस का लक्ष्य ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा में योगदान देना, अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली में ब्रिक्स की भूमिका को बढ़ाना, अंतरबैंक सहयोग का विस्तार करना और आपसी व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ाना है।