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Interim Budget 2024: चुनावी साल का सरपट,चुनौती भरा अंतरिम बजट !

Interim Budget 2024 की बात करें तो यह मोदी सरकार के दूसरा कार्यकाल का अंतरिम बजट के तौर पर आखिरी बजट होगा, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2024 को पेश करेंगी।

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Interim Budget 2024
Interim Budget 2024

Interim Budget 2024 की बात करें तो यह मोदी सरकार के दूसरा कार्यकाल का अंतरिम बजट के तौर पर आखिरी बजट होगा, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2024 को पेश करेंगी। इस वर्ष चुनाव होने के कारण पूर्ण बजट चुनावी नतीजों के बाद नई सरकार के गठन के बाद पेश किया जाएगा।

Interim Budget 2024 को लेकर आम जनता के मन में हमेशा उत्सुकता रहती है कि सरकार उन्हें राहत देने के लिए कई योजनाओं का ऐलान कर सकती है। इससे इनकम टैक्स में भी राहत मिल सकती है। हालांकि, इस बार ऐसा नहीं होगा। पूर्ण बजट आम चुनाव के बाद पेश किया जाएगा। केंद्र सरकार आगामी बजट में शहरी और मिडिल क्लास लोगों के लिए नई हाउसिंग स्कीम का ऐलान कर सकती है। इस योजना के तहत होम लोन पर अदा की ब्याज दर पर 3 से लेकर 6 प्रतिशत की सब्सिडी सरकार की ओर से दी जाएगी।

Interim Budget 2024: अंतरिम बजट में क्या-क्या शामिल?

सरकार 2025-26 वित्तीय वर्ष (FY) के अंत तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.50% तक सीमित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जो चालू वर्ष में मार्च 2024 के अंत तक 5.90% है।

अंतरिम बजट में मुख्य रूप से सरकार के व्यय, राजस्व, राजकोषीय घाटा, वित्तीय प्रदर्शन और आने वाले महीनों के अनुमान शामिल होते हैं। अंतरिम बजट में कोई बड़ी नीतिगत घोषणा पेश नहीं की जाती, ताकि सरकार पर वादों का बोझ न पड़े। भारत निर्वाचन आयोग की आचार संहिता के अनुसार, अंतरिम बजट में कोई भी बड़ी योजना शामिल नहीं होनी चाहिए। क्योंकि यह मतदाताओं को वर्तमान सत्तारूढ़ सरकार के पक्ष में प्रभावित कर सकती है। यहां तक​​ कि मौजूदा सरकार को भी अंतरिम बजट के साथ आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने की अनुमति नहीं है।

Interim Budget 2024: वोट ऑन अकाउंट का मतलब

संसद अंतरिम बजट के माध्यम से वोट ऑन अकाउंट पारित करती है। वोट ऑन अकाउंट को एक ऐसे प्रावधान के रूप में वर्णित किया जा सकता है जो मौजूदा सरकार को वेतन और चल रहे खर्चों जैसे आवश्यक सरकारी खर्चों के लिए संसदीय मंजूरी प्राप्त करने की अनुमति देता है।

बुनियादी ढ़ांचे में परिवर्तन की पहल

उल्लेखनीय है कि संभावना व्यक्त की जा रही है कि निजी निवेश चक्र को पुनर्जीवित करने के लिए भारत के बुनियादी ढांचे में निरंतर और तेजी से सुधार सर्वोपरि होगा। भारत की विशाल क्षमता का लाभ उठाने और मध्यम से लंबी अवधि में सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए, मानव संसाधन में सुधार करने की आवश्यकता होगी, यही कारण है कि शिक्षा पर खर्च सरकार की मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए।

ओल्ड टैक्स रिजीम की स्थिति

टैक्‍सपेयर्स ओल्ड टैक्स रिजीम को भी जारी रखने की उम्मीद कर रहे हैं। वित्त मंत्रालय ने भले टैक्स के ओल्ड रिजीम को खत्म न किया हो, लेकिन उन्हें आशंका है कि सरकार अब न्यू टैक्स रिजीम ले आई है। ऐसे में ओल्ड टैक्स रिजीम खत्म हो सकता है।

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टैक्स फ्री हो सैलरी

कई सरकार नौकरीपेशा वाले लोग टैक्स में बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। वो चाह रहे हैं कि टैक्स से छूट मिले। सरकार टैक्स रिजीम में बदलाव कर 8 लाख तक की सैलरी को टैक्स फ्री कर दे तो इन्हें बड़ी राहत मिल सकती है।

80D की डिडक्शन की लिमिट

टैक्सपेयर्स की डिमांड है कि सेक्शन 80D के तहत मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम में डिडक्शन लिमिट 50 हजार रुपये की जाए। फिलहाल यह लिमिट 25 हजार रुपये है। सीनियर सिटीजन्स के लिए इस लिमिट को 50 से 75 हजार रुपये किया जाएगा।

राजकोषीय घाटे को पाटने की कवायद

जानकारों की माने तो सरकार 2025-26 वित्तीय वर्ष (FY) के अंत तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.50% तक सीमित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जो चालू वर्ष में मार्च 2024 के अंत तक 5.90% है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि अंतरिम बजट में 2024-25 में जीडीपी के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटे को 5.30% तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वे के अनुसार 2025-26 में 4.5 फीसदी के घाटे के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुल व्यय में औसतन प्रति वित्त वर्ष सात फीसदी से अधिक की वृद्धि की जरूरत नहीं होगी

11.50 ट्रिलियन रुपये होने का अनुमान

ज्यादातर एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले वर्षों में व्यय में और भी आक्रामक कटौती की संभावना है। इतना ही नहीं पूंजीगत खर्च पहले ही इस वित्तीय वर्ष में 33% से अधिक बढ़कर 10 ट्रिलियन रुपये ($ 120 बिलियन) हो गया है और निजी निवेश में वृद्धि की उम्मीद के साथ अगले वित्तीय वर्ष में इसके 15% बढ़कर 11.50 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।